उत्तरप्रदेश के इस पूरे गाँव में फैला AIDS, लोगों में मची अफरा तफरी

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यूपी: वैसे तो इंसान की बहुत सारी जरूरतें होती हैं जिनमे रोटी, कपडा और मकान उनकी अहम जरूरतें है. मगर इसके इलावा भी इंसान की एक मुख्य जरूरत है, जिसका ज़िक्र करने से लगभग हर कोई झिझक महसूस करता है. शायद आप हमारी बात का इशारा समझ ही चुके होंगे. दरअसल, जिस प्रकार इंसान को जीने के लिए रोटी चाहिए, उसी प्रकार इंसान को अपना वंश आगे बढाने के लिए शारीरक संबंध बनाने पड़ते हैं. बहुत सारे लोग अपनी पत्नी को ही अपना पहला और आखिरी प्यार मानकर उनके साथ जिस्मानी संबंध कायम करते हैं. जबकि अधिकतर मर्द औरतों के जिस्म के भूखे होते हैं और लड़की देख कर ही उनपर टूट पड़ते हैं.

केवल भारत ही नहीं बल्कि, बहुत सारे ऐसे देश हैं जहाँ चंद पैसों के बदले लड़कियां अपना जिस्म बेचने को मजबूर होती हैं और मर्द उन लड़कियों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं. ऐसे में कईं बार इंसान से ना चाहते हुए भी ऐसी गलतियाँ हो जाती हैं, जिनके कारण उनका संबंध बनाना उन्हें भारी पड़ जाता है और बदले में उन्हें एचआईवी एड्स जैसी घातक बिमारी दे जाता हैं. इस आर्टिकल की शुरुआत करने से पहले चलिए आज हम आपको एक कहानी के बारे में बताते हैं-

एक गांव में अनपढ़ों का झोला छाप डॉक्टर रहता था. गांव वालों के अनुसार वह बहुत बड़ा डॉक्टर था लेकिन हकीकत में उस डॉक्टर को खुद के इलाज की जरूरत थी. शहरी लोग उस डॉक्टर को पागल बताते थे. जो लोग उस डॉक्टर की हकीकत से वाकिफ नहीं थे बस वही उससे अपना इलाज करवाते थे. उस डॉक्टर को कुछ आता नहीं था और ना ही वह दवाई देता था. जिस मरीज को थोड़ी भी तकलीफ होती तो वह उसको 10 रूपये में 1 इंजेक्शन लगा देता. दस रुपए मे से कुछ बचत करने के लिए वह सुई को स्टेरलाइज नहीं करता था और सभी को उसी सुई से इंजेक्शन दे देता था. डॉक्टर की इस बेवकूफी की वजह से गांव में रहने वाले सैंकड़ों लोग एचआईवी पॉजिटिव हो गए.

पढ़ने और सुनने में शायद आपको यह कहानी लग रही होगी या किसी फिल्म की स्क्रिप्ट. लेकिन काश ये एक स्क्रिप्ट या एक कहानी होती. परंतु आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह कोई स्क्रिप्ट नहीं बल्कि एक सच्ची घटना है. दरअसल, भारत के उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के बांगरमऊ में एक ऐसा ही झोलाछाप डॉक्टर रहता है. एक रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर राजेंद्र कुमार एक ही सुई से कई लोगों को इंजेक्शन देता रहा.

जब गांव में 600 लोगों की एचआईवी जांच हुई तो उनमें से 21 लोग एड्स में पॉजिटिव पाए गए. सिर्फ 600 में से 21 लोग एड्स के मरीज बन चुके हैं यानि कि जैसे-जैसे जांच के लिए लोगों की संख्या बढ़ती जाएगी वैसे-वैसे एचआईवी एड्स के केस भी बढ़ते रहेंगे. गांव की समस्या को सुलझाने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग पूरे गांव में कैंप बनाकर एचआईवी जांच करवाने की प्लानिंग कर रहा है.

एक ही गांव में सैंकड़ों लोगों का एचआईवी पॉजिटिव होना अपने आप में एक बहुत बड़ा और गंभीर विषय बनता जा रहा है. इस बात की भनक स्वास्थ्य विभाग को तब लगी जब उन्हें एक ही गांव में लगातार इतने एचआईवी एड्स पॉजिटिव केस मिले.

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